(1) मरीचि के पुत्र कश्यप प्रजापति थे। ब्रह्मदेव की दाहिनी हाथ की बोटे की नली से दक्ष नाम का पुरुष और बाएँ हाथ की बोटे की नली से धरनी नाम की स्त्री जन्मीं। उन दोनों से एक हज़ार-हज़ार महा ऋषि जन्मे। (2) ब्रह्मा के मानस पुत्रों में दूसरे स्थान पर रहने वाले अंगिरस्‍ु को उद्दध्य, बृहस्पति और संवर्त जैसे पुत्र हुए। बृहस्पति देवताओं के आचार्य बने। (3) मैत्रि (अत्रि) नामक मानस पुत्र से अनेक महा मुनि जन्मे। (4) पुलस्त्य नामक ब्रह्मा के मानस पुत्र से राक्षसों का जन्म हुआ। (5) पुलह नामक मानस पुत्र से किन्नर और किमपुरुष वर्ग उत्पन्न हुए। (6) क्रतू नामक मानस पुत्र से पक्षियों की जाति उत्पन्न हुई।

   
    

Mahabharata - Drona Parva


॥ श्रीः ॥
7.63. अध्यायः 063
Mahabharata - Drona Parva - Chapter Topics
नारद उवाच।


Mahabharata - Drona Parva - Chapter Text

नारद उवाच। 7-63-0x(4418)(47113)
ययातिं नाहुषं चैव मृतं सृञ्जय शुश्रुम।
`य इमां पृथिवीं जित्वा ससमुद्रां सपर्वताम्॥ 7-63-1(47114)
शम्याप्रासेन निर्माय वेदीः सन्नतदक्षिणाः।
ईजानः क्रतुभिः पुण्यैः पर्यगच्छत्प्रदक्षिणम्'॥ 7-63-2(47115)
राजसूयशतैरिष्ट्वा सोऽश्वमेधशतेन च।
पुण्डरीकसहस्रेण वाजपेयशतैस्तथा॥ 7-63-3(47116)
अतिरात्रसहस्रेण चातुर्मास्यैश्च कामतः।
अग्निष्टोमैश्च विविधैः सत्रैश्च प्राज्यदक्षिणैः॥ 7-63-4(47117)
अब्राह्मणानां यद्वित्तं पृथिव्यामस्ति किञ्चन।
तत्सर्वं परिसङ्ख्याय ततो ब्राह्मणसात्करोत्॥ 7-63-5(47118)
सरस्वती पुण्यतमा नदीनां
तथा समुद्राः सरितः साद्रयश्च।
ईजानाय पुण्यतमाय राज्ञे
घृतं पयो दुदुहुर्नाहुषाय॥ 7-63-6(47119)
व्यूढे देवासुरे युद्धे कृत्वा देवसहायताम्।
चतुर्धा व्यभजत्सर्वां चतुर्भ्यः पृथिवीमिमाम्॥ 7-63-7(47120)
यज्ञैर्नानाविधैरिष्ट्वा प्रजामुत्पाद्य चोत्तमाम्।
देवयान्यां चौशनस्यां शर्मिष्ठायां च धर्मतः॥ 7-63-8(47121)
देवारण्येषु सर्वेषु विजहारामरोपमः।
आत्मनः कामचारेण द्वितीय इव वारावः॥ 7-63-9(47122)
यदा नाभ्यगमच्छान्तिं कामानां सर्ववेदवित्।
ततो गाथामिमां गीत्वा सदारः प्राविशद्वनम्॥ 7-63-10(47123)
यत्पृथिव्यां व्रीहियवं हिरण्यं पशवः स्त्रियः।
नालमेकस्य तत्सर्वमिति मत्वा शमं व्रजेत्॥ 7-63-11(47124)
एवं कामान्परित्यज्य ययातिर्धृतिमेत्य च।
पूरुं राज्ये प्रतिष्ठाप्य प्रयातो वनमीश्वरः॥ 7-63-12(47125)
स चेन्ममार सृञ्जय चतुर्भद्रतरस्त्वया।
पुत्रात्पुण्यतरस्तुभ्यं मा पुत्रमनुतप्यथाः।
अयज्वानमदक्षिण्यमभि श्वैत्येत्युदाहरत्॥ ॥ 7-63-13(47126)

इति श्रीमन्महाभारते द्रोणपर्वणि अभिमन्युवधपर्वणि षोडशराजकीये त्रिषष्टितमोऽध्यायः॥ 63 ॥

Mahabharata - Drona Parva - Chapter Footnotes

5-63-4 प्राज्यदक्षिणैः बहुदक्षिणैः॥ 5-63-5 अब्राह्मणानां ब्राह्मणद्वेषिणाम्। म्लेच्छानामिति यावत्। परिसङ्क्याय अपहृत्य॥ 5-63-7 चतुर्भ्यः ऋत्विग्भ्यः। प्राचीदिग्घोतुर्दक्षिणाध्वर्योरित्यादिश्रुतेः॥ 5-63-63 त्रिषष्टितमोऽध्यायः॥


Mahabharat- Hindi (Devanagari) 100000 shlokas

www.sanatanadharm.com - play store app (sanatana dharm)

"Bharathiya Sanatana Dharm" and Sanatana Dharmam & Dharmo rakshati Rakshitha logo are our trademarks. Unauthorised use of "Sanatana Dharmam & Dharmo rakshoati Rakshitha" and the logo is not allowed. Copyright © sanatanadharm.com All Rights Reserved . Made in India.